कबड्डी खिलाड़ी नहीं बनता तो अभिनेता बनने की कोशिश करता: रोहित

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): भारतीय कबड्डी टीम के खिलाड़ी रोहित कुमार का कहना है कि अगर वह कबड्डी खिलाड़ी नहीं बनते तो अभिनेता बनने की कोशिश करते। रोहित प्रो कबड्डी लीग में पटना पाईरेट्स के लिए खेलते थे जिस दौरान उनकी टीम ने खिताब जीता था। उन्हें मोस्ट वेल्युएबल खिलाड़ी का पुरस्कार भी दिया गया था। उन्होंने 2017 में बेंगलुरु बुल्स के साथ अपना सफर शुरु किया और छठे सत्र में कप्तान के रुप में अपनी टीम को खिताब दिलाया। रोहित 2016 दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा भी थे।

रोहित ने प्रो कबड्डी लीग के इंस्टाग्राम लाइव चैट के दौरान कहा कि अगर वह कबड्डी खिलाड़ी नहीं बनते तो अभिनेता बनने की कोशिश करते। उन्होंने कहा, “बचपन में मुझे खेल के प्रति कोई लगाव नहीं था। गांव में मुझसे बड़े लोग कबड्डी खेला करते थे। मैंने राकेश कुमार को कुछ अन्य खिलाड़ियों के साथ कबड्डी खेलते देखा और इससे मुझे यह खेल खेलने की प्रेरणा मिली। मेरे पिता ने कुछ समय के लिए कबड्डी खेला लेकिन इसके बाद वह दिल्ली पुलिस में शामिल हुए।”

रोहित ने कहा, “मेरे पिता चाहते थे कि मैं कबड्डी खेलूं और इसके लिए वह मुझे गांव में मैच दिखाने ले जाते थे। मैं सोचता था कि अगर मैं राकेश कुमार की तरह बना तो यह सही रहेगा। मैंने ऐसे कबड्डी की शुरुआत की थी लेकिन मैं निरंतर नहीं खेलता था, मैंने कई खेल खेले।” उन्होंने कहा, “मैं एथलेटिक्स भी खेलता था और टीम खेल के बजाए व्यक्तिगत खेल खेलना चाहता था। मैं 100 मीटर, 200 मीटर दौड़ में अच्छा था। इसके अलावा लंबी कूद में भी बेहतर था।”

रोहित ने कहा, “मैंने कबड्डी खेलने का फैसला किया क्योंकि मैं इस खेल को जानता था और मेरे पिता ने मुझे इसमें अपना करियर बनाने के लिए काफी मेहनत की थी। मेरा राज्य टीम में चुनाव हुआ और मैं इसका आनंद लेने लगा।” उन्होंने कहा, “जब मुझे किट बैग मिला तो मुझे काफी खुशी हुई। जब मैंने दिल्ली टीम की जर्सी पहनी तो मेरे मन में राष्ट्रीय टीम में शामिल होने की इच्छा जगी और मैंने इसके लिए काफी मेहनत की।”

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